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गांव, सरकारी स्कूल और चकमक क्लबसुनील बागवान मेरे घर वाले मुझे और मेरे बड़े भाई को पढ़ाना चाहते थे। स्कूल ना जाने पर मेरी अक्सर पिटाई होती रहती थी। बस्ता लेकर घर से निकलना, किसी दोस्त के साथ खेत पर चले जाना या फिर कहीं खेलते रहना और स्कूल की छुट्टी के समय वापस घर लौट आना, लगभग हम चार-पांच दोस्तों की आदत बन गई थी। माता-पिता काम पर चले जाते थे। जब घर वालों को यह बात मालूम पड़ी तो मेरी जमकर पिटाई हुई। घर वाले अगले दिन कान पकड़कर स्कूल लेकर आए। घर और स्कूल में सख्ती कुछ ज्यादा ही बढ़ गई।
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